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tabarayi
Bihar-ul-anwar ki jild No.8 ke Baab No.10, safa No.391 per hadees No.37 per Janab Baqer Majlisi (ar) ne kitaab rijaal kashfi ke P.No.242 se yeh darj kartey hain:

‘Ahmed bin Ibrahim Quraishi ka bayan hai ke mujh se baaz as-haab ne yeh bayan kiya ke jab Eid ka din aata tho maali bin qanais (a.r) apney sar per qaak udatey huwey fariyaadiyon ki si shakle banaye sehra ki taraf jaatey aur jab qateeb member per jata tho yeh apney dono haath asman ki taraf baland kar ke kehtey “Parvardigar! Jis jagah yeh (eidain ka qutba deney wala) khada hai, yeh jagah tho dar-haqeeath terey muntaqib bando ki hai, yeh moqam un (a.s) ka hai jin ko thu ney apni amanaton ke liye maqsoos kiya hai, magar har shey ka muqaddar bananey wala thu (j.j) hi hai, terey faisley per koi ghalib nahi aa sakta, teri tadbeer aisi hatmi hoti hai ke is se hargiz koi tajawooz nahi kar sakta, thu jo chahey karey aur jaisa chahey karey, jis tarha tujhey apni maqlooqat ka ilm hai usi tarha tujhey apney iradey ka bhi ilm hai.”
“Parvardigaar! Terey muntaqib bandey terey qolfa (a.s) itney maghloob hai ke wo apni ankhon se dekh rahey hain ke terey ahkaam badal diye gaye hain, teri kitab pas-e-pusht daal di gayi hai, terey ayed kiye huwey farayez mein tehreef kardi gayi hai, terey nabi (sawaws) ki sunat tark kardi gayi hai, laikin wo (terey munqaib bandey aur terey qulfa <a.s>) bol nahi saktey”
“Parvardigaar! Awwaleen wa aqireen, guzishta wa aainda, mey jo log bhi unkey dushman hain, un sab per teri lanath ho, Parvardigaar! Humarey zamaney ke zalimon per unkey peechey chalney walon per unki itteba karney walon per unkey gurohon, unkey madadgaron per teri lanath ho beshak thu har shey per qadir hai”

Nalain-bardar-e-Ahl-e-Wila dua goh hai, ke Imam-e-Zamana (ajtfj) toufeeq ata karey ke muddayaan-e-ilm wa wilayet raah-e-rast per aajayen. “Ilahi ameen ya rubul alameen ba tufail-e-masumeen (a.s)”
zakikhan110
zakikhan110
Posted December 10, 2012 by zakikhan110
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Abid Husain
महात्मा गांधी : मैंने हुसैन से सीखा की मज़लूमियत में किस तरह जीत हासिल की जा सकती है! इस्लाम की बढ़ोतरी तलवार पर निर्भर नहीं करती बल्कि हुसैन के बलिदान का एक नतीजा है जो एक महान संत थे!

रबिन्द्र नाथ टैगौर : इन्साफ और सच्चाई को ज़िंदा रखने के लिए, फौजों या हथियारों की ज़रुरत नहीं होती है! कुर्बानियां देकर भी फ़तह (जीत) हासिल की जा सकती है, जैसे की इमाम हुसैन ने कर्बला में किया!

पंडित जवाहरलाल नेहरु : इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की क़ुर्बानी तमाम गिरोहों और सारे समाज के लिए है, और यह क़ुर्बानी इंसानियत की भलाई की एक अनमोल मिसाल है!

डॉ राजेंद्र प्रसाद : इमाम हुसैन की कुर्बानी किसी एक मुल्क या कौम तक सिमित नहीं है, बल्कि यह लोगों में भाईचारे का एक असीमित राज्य है!

डॉ. राधाकृष्णन : अगरचे इमाम हुसैन ने सदियों पहले अपनी शहादत दी, लेकिन इनकी इनकी पाक रूह आज भी लोगों के दिलों पर राज करती है!

स्वामी शंकराचार्य : यह इमाम हुसैन की कुर्बानियों का नतीजा है की आज इस्लाम का नाम बक़ी है नहीं तो आज इस्लाम का नाम लेने वाला पुरी दुन्या में कोई भी नहीं होता

श्रीमती सरोजिनी नायडू : मै मुसलमानों को इसलिए मुबारकबाद पेश करना चाहती हूँ की यह उनकी खुशकिस्मती है की उनके बीच दुन्या की सब से बड़ी हस्ती इमाम हुसैन (अ:स) पैदा हुए जो संपूर्ण रूप से दुन्या भर के तमाम जाती और समूह के दिलों पर राज किया और करता है!

एडवर्ड ब्राउन : कर्बला में खूनी सहरा की याद जहां अल्लाह के रसूल का नवासा प्यास के मारे ज़मीन पर गिरा और जिसके चारों तरफ सगे सम्बन्धियों के लाशें थीं यह इस बात को समझने के लिए काफी है की दुश्मनों की दीवानगी अपने चरम सीमा पर थी, और यह सब से बड़ा ग़म (शोक) है जहाँ भावनाओं और आत्मा पर इस तरह नियंत्रण था की इमाम हुसैन को किसी भी प्रकार का दर्द, ख़तरा और किसी भी प्रिये की मौत ने उन के क़दम को नहीं डगमगाया!

इग्नाज़ गोल्ज़ेहर : बुराइयों और हज़रत अली के खानदान पर हुए ज़ुल्म और प्रकोप पर उनके शहीदों पर रोना और आंसू बहाना इस बात का प्रमाण है की संसार की कोई भी ताक़त ईनके अनुयायों को रोने या ग़म मनाने से नहीं रोक सकती है और अक्षर "शिया" अरबी भाषा में कर्बला की निशानी बन गए हैं!

डॉ के शेल्ड्रेक : इस बहादुर और निडर लोगों में सभी औरतें और बच्चे इस बात को अची तरह से जानते और समझते थे की दुश्मन की फौजों ने इनका घेरा किया हुआ है, और दुश्मन सिर्फ लड़ने के लिए नहीं बल्कि इनको क़त्ल करने के लिए तैयार हैं! जलती रेत, तपता सूरज और बच्चों की प्यास ने भी इन्हें एक पल के, ईन में से किसी एक व्यक्ति को भी अपना क़दम डगमगाने नहीं दिया! हुसैन अपनी एक छोटी टुकड़ी के साथ आगे बढ़े, न किसी शान के लिए, न धन के लिए, न ही किसी अधिकार और सत्ता के लिए, बल्कि वो बढ़े एक बहुत बड़ी क़ुर्बानी देने के लिए जिस में उन्होंने हर क़दम पर सारी मुश्किलों का सामना करते हुए भी अपनी अपनी सत्यता का कारनामा दिखा दिया!

चार्ल्स डिकेन्स : अगर हुसैन अपनी संसारिक इच्छाओं के लिए लड़े थे तो मुझे यह समझ नहीं आता की उन्हों ने अपनी बहन, पत्नी और बच्चों को साथ क्यों लिया! इसी कारण मै यह सोचने और कहने पर विवश हूँ के उन्हों ने पूरी तरह से सिर्फ इस्लाम के लिए अपने पुरे परिवार का बलिदान दिया ताकि इस्लाम बच जाए!

अंटोनी बारा : मानवता के वर्तमान और अतीत के इतिहास में कोई भी युद्ध ऐसा नहीं है जिसने इतनी मात्रा में सहानूभूती और प्रशंसा हासिल की है और सारी मानवजाती को इतना अधिक उपदेश व उदाहरण दिया है जितनी इमाम हुसैन की शहादत ने कर्बला के युद्ध से दी है!

थॉमस कार्लाईल : कर्बला की दुखद घटना से जो हमें सब से बड़ी सीख मिलती है वो यह है की इमाम हुसैन और इनके साथियों का भगवान् पर अटूट विश्वास था और वोह सब मोमिन (भगवान् से डरने वाले) थे! इमाम हुसैन ने यह दिखा दिया की सैन्य विशालता ताक़त नहीं बन सकती!

रेनौल्ड निकोल्सन : हुसैन गिरे, तीरों से छिदे हुए, इनके बहादुर सदस्य आखरी हद तक मारे-काटे जा चुके थे, मुहम्मदी परम्परा अपने अंत पर पहुँच जाती, अगर इस असाधारण शहादत और क़ुर्बानी को पेश न किया जाता! इस घटना ने पुरी बनी उमय्या को हुसैन के परिवार का दुश्मन, यज़ीद को हत्यारा और इमाम हुसैन को "शहीद" घोषित कर दिया
aliwale
ye dil ki aarzu ab meesume tammar tak phounche
sana karte hue hyder ki hum bhi daaar tak phounche
zamana laakh koshish karke mujh ko rook na paya
safar karte hue aansu mere sarkaar tak phounche
rajab ki teervi ko ye kaha kabe na khaliq se
khudaya madar e hyder meri deewaaar tak phounche
chalakar teer hontoun se kaha asghar ne yun hanske
ye andaaz e vigha ab hyder e karrar tak phounche
harakar zulm ke kantoun ko rahe sham o kufa mein
ye chale paoun ke hanste hue beemaar tak phounche
saqawat ki jhalak aayi nazar yun mezbani mein
ke abbas e ali pani liye zawwaaar tak phounche
hussain ibne ali kya hai kashish is naam mein tere
bahe aansu masayeb jab tere agyaar tak phounche
ba waqt e asr aksar abid e beemaaar ke bazu
wazu karne ki khatir aansoun ki dhaar tak phounche
hussain ibne ali ke khoon ke badle ka badla hai
nabi chalte hue khud hashr mein muqtaar tak phounche
hussian ibne ali ke rouzaye anwar pa main jaoun
qamar ki ilteja ab shaah ke darbaaar tak phounche

by qamar hyder (younus hyder aliwale)

ALIWALE
Shia Academy
The Best Amongst You
Posted September 18, 2012 by Shia Academy in Public
The Messenger of Allah (blessings of Allah be upon him and his family) has said: “The best of those amongst you is the one who learns the Qur’an and then teaches it to others.”

Al-Amali of Shaykh at-Tusi, Volume 1, Page 5
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